user avatar
चाय, इश्क और राजनीति।
@chayisquerajnit
ख़त लिखने वाला लड़का। Speech Writer (MLA & Rajya Sabha)| Translator| Business / Work contact: chayishqrajniti@gmail.com
india
Joined October 2022
  • Pinned
    user avatar
    मैं इस दुनिया के सारे पन्नों को जी लेना चाहता हूँ। हर उस शब्द को अपनी साँसों में उतार लेना चाहता हूँ जो कभी किसी कोने में बैठकर किसी ने रोते या मुस्कुराते हुए लिखा हो। और फिर, मैं उन सब किताबों में लिखे को भूल जाना चाहता हूँ, और एकदम कोरे कागज़ की तरह साफ़ हो जाना चाहता हूँ।
  • user avatar
    "एडवांस में बिहार की जीत मुबारक राहुल।" प्रिय राहुल, @RahulGandhi तुम ग़ज़ब हो दोस्त। लोग हैरान होंगे कि उम्र का इतना फ़ासला होते हुए भी मैं तुम्हें दोस्त क्यों कह रहा हूँ। पर सच यही है कि लोग नेता बनते हैं, और तुम दोस्त बने हो। कोई तुम्हें बेटा कहे, कोई भाई, कोई गाँव, तुम्हारे
  • user avatar
    "इतिहास तुम्हें निर्देशक नहीं, साम्प्रदायिकता का दलाल कहेगा।" प्रिय विवेक अग्निहोत्री, @vivekagnihotri कलम जब गुस्से से थरथराती है, तो शब्द तलवार से भी ज़्यादा धारदार हो जाते हैं। मैं आज उसी थरथराहट के साथ आपको ये ख़त लिख रहा हूँ। लोगों ने सिनेमा को मंदिर का रूप दिया था, जहाँ
  • user avatar
    भाजपा का राइट विंग इस देश के लिए एक दीमक है – जो देश को भीतर से खोखला कर रहे हैं। सबका अपना-अपना धर्म है, तुम मैच जीतने से मतलब रखो ना यार। जब जेमिमा ने जीसस को धन्यवाद और बाइबल की एक पंक्ति पढ़ने की बात कही, तो इनके पेट में मरोड़ उठ गई। लेकिन जब मनु भाकर ने कहा कि वो गीता
  • user avatar
    "जिस राहुल को देश ने हँसकर ठुकराया था, वही सबसे चुपचाप जोड़ता रहा हिंदुस्तान!" प्रिय राहुल, @RahulGandhi दिल्ली की इस गर्म दोपहर में, जब बादल छत पर घुटनों के बल आकर बैठ गए हैं और खिड़की से बाहर झाँकता आसमान उदास कवि की तरह चुप है- मैं तुम्हें एक खत लिख रहा हूँ। तुम क्या खूब
  • user avatar
    "इतिहास का मास्टर, सत्ता का स्टोरीटेलर!" प्रिय विकास दिव्यकृति, रात के ढाई बज रहे हैं। जिन सड़कों पर दिनभर गाड़ियाँ दौड़ती थीं, अब वहाँ सन्नाटा पसरा है। इन सूनी गलियों पर अब कुत्तों का कब्जा है। रात होते ही जैसे उनके अधिकार क्षेत्र का ऐलान हो जाता है - जो भी गलती से वहाँ से
  • user avatar
    "PDF से म्यांमार तक: ख़ुरपेंच का खोखला पर्दाफाश।" प्रिय ख़ुरपेंच, @khurpenchh तुम्हारा नाम सुनते ही आंखों के सामने कोई खेतिहर औज़ार-सा दृश्य उभरता है, जो ज़मीन को चीरे बिना चैन नहीं लेता। लेकिन अफ़सोस, तुम्हारे शब्द उस मिट्टी को नहीं, बल्कि समाज की साख को चीरे चले जा रहे हैं।
  • user avatar
    "हँसी उड़ाते थे? अब वही आवाज़ लोकतंत्र की अलार्म बन चुकी है।" प्रिय राहुल गांधी, @RahulGandhi आज जब मैं यह ख़त लिखने बैठा हूँ, तो लगता है जैसे मैं किसी राजनीतिक नेता को नहीं, बल्कि एक यात्री को लिख रहा हूँ, जो अपनी थकान, आलोचनाओं और चोटों के बावजूद रास्ता नहीं छोड़ता। इस देश की
  • user avatar
    "खामोशियों के उस पार तेजप्रताप।" प्रिय तेजप्रताप, @TejYadav14 एयरपोर्ट की भीड़ में लोग अपने अपने मंज़िल की ओर भाग रहे थे, कोई उड़ान पकड़ने की जल्दी में, कोई किसी को विदा करने की बेचैनी में। और उसी भीड़ में आप खड़े थे, सफ़ेद कुर्ते में, एक अजीब सी ख़ामोशी ओढ़े हुए। चेहरे पर न
  • user avatar
    "जिस राहुल को देश ने हँसकर ठुकराया, वही सबसे चुपचाप जोड़ता रहा हिंदुस्तान!" प्रिय राहुल, @RahulGandhi दिल्ली की इस गर्म दोपहर में, जब बादल छत पर घुटनों के बल आकर बैठ गए हैं और खिड़की से बाहर झाँकता आसमान उदास कवि की तरह चुप है- मैं तुम्हें एक खत लिख रहा हूँ। जन्मदिन मुबारक,
  • user avatar
    "ग्राउंड की रिपोर्टर – मेधा यादव।" प्रिय मेधा यादव, @Medhareports शाम उतर रही है। सूरज अब आसमान के आख़िरी सिरों पर धीमे-धीमे धुँधला रहा है। सड़कों पर गाड़ियों की रफ़्तार थोड़ी थकान लिए दौड़ रही है, जैसे दिन भर की भागदौड़ के बाद अब सबको कहीं न कहीं लौटना है। पर मैं नहीं लौट रहा,
  • user avatar
    "चाटुकारिता की चाशनी में डूबा लल्लनटॉप।" प्रिय सौरभ द्विवेदी, @saurabhtop कभी तुम एक उम्मीद हुआ करते थे। इस देश की पत्रकारिता जब अंधेरों में गुम हो रही थी, तब "लल्लनटॉप" नाम की एक मशाल जलाकर तुम सामने आए। तुमने हमें सिखाया कि खबर केवल खबर नहीं होती, उसका एक दिल भी होता है।
  • user avatar
    "मोदी जी का लंबा भाषण धुल गया… सिर्फ़ बारिश में राहुल गांधी की ‘जन गण मन’ की गूंज से।" प्रिय राहुल, @RahulGandhi आज जब मैंने आपको इंदिरा भवन के आँगन में खड़ा देखा – सफ़ेद कुर्ता भीगता हुआ, माथे से बारिश की बूँदें बहकर ज़मीन में उतरती हुई – तो लगा जैसे यह दृश्य किसी फ़ोटोग्राफ़
  • user avatar
    "लाल टोपी वाले लड़के को, जन्मदिन मुबारक।" प्रिय अखिलेश भैया, @yadavakhilesh जुलाई की इस सुबह ने जब आंखें खोलीं, तो अख़बार नहीं, दिल ने याद दिलाया - आज तुम्हारा जन्मदिन है। और मैं सोचने लगा, क्या एक नेता को भी मुहब्बत की तरह लिखा जा सकता है? उत्तर मिला - हाँ, अगर वो आदमी भीड़ से