मो सम दीन न दीन हित, तुम्ह समान रघुबीर। अस बिचारि रघुबंस मनि, हरहु बिषम भव भीर॥ हे रघुवीर! मेरे समान तो कोई दीन नहीं है और आपके समान कोई दीनबंधु नही है। ऐसा विचारकर हे रघुवंश-मणि! जन्म-मरण के महान् भय का नाश कीजिए। 🚩II जय सिया राम II 🚩 https://t.co/cGO8sEbE6O