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मेरी आज की पहचान,
मेरा आज का सिनेमा,
और 2025 का वो सफ़र जिसने मुझे फ़िल्मों में एक नई जगह दी…उन सब की जड़ में मुक्काबाज़ है।
इस फ़िल्म ने मुझे सिर्फ़ एक अभिनेता ही नहीं बनाया, बल्कि इसने मुझे यक़ीन करना सिखाया— खुद पर, अपनी कहानी पर, अपने अंदर की आवाज़ पर और अपने समय पर। क्योंकि





















