कोई कह रहा है अहंकार हार गया, कोई कह रहा है कि लोकतंत्र जीत गया, कोई कह रहा सरकार की हार है, कोई कह रहा हैं आंदोलन की जीत है, तो कोई कहता है तानाशाही हार गयी, कोई कह रहा है कि किसान जीत गए,लेकिन सच्चाई ये है कि “कृषि सुधार” हार गए ! कुछ वर्षों बाद इन्हीं सुधारो की माँग फिर उठेगी