मैंने मनमोहन सिंह के पूरे कार्यकाल में उनकी बहुत आलोचनाएं की हैं और मैं इतिहास का वो छात्र भी नहीं जो उनके प्रति रहमदिल हो जाऊं. बावजूद इसके यदि देश आज उनके लिए दुआ कर रहा है तो इसीलिए कि वो तुलनात्मक रूप से बेहतर शासक थे जो आज भी विनम्रतापूर्वक सलाह दे रहा है.
ठीक महीने भर पहले @PrashantKishor ने कहा था कि यदि चुनाव के बीच पैरामिलिट्री फोर्स पर हमला ना हुआ तो बीजेपी कुछ भी कर ले लेकिन TMC से अपनी हार का फ़र्क़ कम नहीं कर सकेगी.अब #NaxalAttack हो गया है.ये आशंका सच कैसे हो गई? जवाब है किसी के पास?
मुझे याद है जब पेट्रोल के दाम कम हुए थे तो मंच से कह रहे थे “नसीब वाला प्रधान मंत्री” हूं. अब महंगे के रिकॉर्ड बना रहा है तो उस हिसाब से नामकरण क्या होना चाहिए?
गांधी ने 1942 में नेहरू को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था और ऐसा शख्स कहा था 'जो मेरे ना रहने पर.. मेरी भाषा बोलेगा'। ऐसा ही हुआ भी।
1948 की जनवरी में जब गोड़से ने गोली चला कर देश के सबसे बड़े अभिभावक को मौत की नींद सुला दिया तब नेहरू ने दुख में डूबकर भी गांधी की ही भाषा बोली।
जो पृथ्वीराज चौहान और राणा प्रताप के बारे में नहीं जानते वो किताब लिखनेवालों को दोष दे रहे हैं. थोड़ा दोष तो आपका भी होगा ना क्योंकि जब पढ़ाया जा रहा था तब आपको जानना नहीं था.
इस बात में कोई झूठ नहीं कि गांधी ने सावरकर के लिए खुद अंग्रेज़ों से रिहाई मांगी थी लेकिन बात पूरी बताई जानी चाहिए. ये तब हुआ था जब तीनों सावरकर भाइयों में सबसे छोटे ने अपने दोनों बड़े भाइयों को मुक्त करवाने की गुहार गांधी से लगाई. मानवता के आधार पर गांधी ने वही किया. अपने लिए कभी