मैं ख़ामोशी तेरे मन की, तू अनकहा अलफ़ाज़ मेरा…
मैं एक उलझा लम्हा, तू रूठा हुआ हालात मेरा ... 🥀
Shayari | India
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Joined January 2009
- महफ़िल में चल रही थी हमारे कत्ल की तैयारी, हम पहुँचे तो बोलें बहुत लम्बी उम्र है तुम्हारी ।।
- वो आराम से हैं....जो पत्थर के हैं , मुसीबत तो.....एहसास वालों की है...
- इस कदर बट गए है ज़माने में सभी, अगर खुदा भी आकर कहें "मै भगवान हूँ " तो लोग पुछ लेंगे , "किसके ?"
- नफरत खुलकर और मुहब्बत छिपकर करते हैं ! हम अपनी ही बनाई दुनियां से कितना डरते है।
- माना की दूरियाँ कुछ बढ़ सी गयीं हैं, लेकिन तेरे हिस्से का वक़्त आज भी तन्हा गुजरता है!
- *फितरत तो कुछ* *यूं भी है, इंसान की,* *बारिश खत्म हो जाये* *तो छतरी बोझ लगती है |*
- मुद्दत के बाद उसने जो आवाज़ दी मुझे, कदमों की क्या बिसात थी, साँसे ठहर गईं...
- बदल दिए हैं हमने अब नाराज होने के तरीके, रूठने की बजाय बस हल्के से मुस्कुरा देते हैं।🙂
- "चलो मर जाते हैं तुम पर...!! बताओ दफ़न करोगे सीने में...!! Hello my dear friends, how are you?
- मेरी चाहतो की शाम उस दिन हसीन हो जाए ।। जब मैं तुम्हे माँगू और हर तरफ आमीन-आमीन हो जाए
- वादा था मुकर गया... नशा था उतर गया... दिल था भर गया... इंसान था बदल गया..
- मेरे होठों पे उंगलियां क्यूं रख दीं तुमने चुप ही कराना था तो.. होंठ रख दिए होते
- मशहूर होने का शौक़ किसे है...... मुझे तो मेरे अपने ही ठीक से पहचान लें, तो भी काफ़ी है.

