विंडो वेटिंग टिकट के कैंसिलेशन चार्जेज आप काटते हो समझ में आता है पर e-ticketing का वेटिंग ऑटोमैटिक कैंसिल हो जाता है उसपर इतना भारी चार्जेज क्यूं काट लेते हो मंत्रीजी?????
देश में जो प्रीमियम ट्रेनें चल रही है वो तो आधे से ज्यादा खाली चलती है और जो बेबस, मजदूरों और आम जन मानस के लिए मेल/एक्सप्रेस/पैसेंजर ट्रेन चलती है उसमें पैसेंजर ऐसे घुसे रहते हैं जैसे भेड़ और बकरियां।देश की जर्जर हालत तो रेलवे स्टेशन पर ही पता चल जाता है।कौन विकास कैसा विकास????
कारण तो genuine है।अब मंत्री जी काम करें तो तकलीफ न करें तो तकलीफ।ऐसे थोड़ी चलेगा।जनता सुधार भी चाहती है और टकरार भी न हो ,ए पॉसिबल नहीं है।सुधार लाने के लिए नकेल तो कसना पड़ेगा न।
भारत में लोगों को तकलीफ होती है तो चुपचाप सह लेते हैं।सरकार के खिलाफ बोलने से डरते हैं कहीं police का डंडा न चल जाए।taklif सबको है पर बोलना कोई नहीं चाह रहा।क्यूं भाई ? जब खुद को बेच दोगे तब बोलोगे?सरकार को हकीक़त का आईना दिखाना जरूरी है नहीं तो सरकार तो अपना गुणगान कर ही रही है।
जब भी लोगों को भटकाना हो तब ये ऐसी ही तरकीबें अपनाएंगे और लोगों को उलझा देंगे। स्थानीय निवासी को भी लगता है कि स्टेट govn उनके बारे में सोच रही है पर असल में लोगो को लड़ाकर बाटने का प्रयास किया जा रहा है। कितना नीचे गिरेंगे।
गर्व तो होता है बिहार की धरती से आते हैं लेकिन ऐसा क्या हुआ कि बिहार इतना पीछे हो गया।ऐसा क्या हुआ कि बिहार की धरती जहां एक समय ज्ञान का अलख या बोलें तो शिक्षा का अलख सबसे पहले जगा वो बिहार की धरती कहीं सबसे पीछे छूटता नजर आ रहा है।चाहे शिक्षा हो,रोजगार हो या स्वास्थ सभी का यही