होली का त्यौहार है या लड़कियों को छेड़ने की खुली आजादी..!
कुछ लोग पूछते हैं हमारा देश सुरक्षित क्यों नहीं...!
क्योंकि हम वह लड़कें हैं, जब भीड़ में होते हैं तो सारी नैतिकता भूल जाते हैं।
हमारे संस्कार सिर्फ सोशल मीडिया में देखने को मिलते हैं या फिर हम जब परिवार के साथ होते हैं।
इसमें कसूर सिर्फ लड़कों का नहीं, हमारे समाज के बुजुर्गों का है। जिन्होंने सिर्फ संस्कार और संस्कृत की बातें की है।
क्योंकि यदि संस्कार दिए होते तो आज लड़के सुधर गए होते।
जो अपने बुजुर्गों से सीखेंगे, वही हम करेंगें और शायद आने वाली पीढ़ियां भी यही करेंगी।
