यह नया इंडिया नहीं, यह है असली भारत – लता मंगेशकर के अंतिम संस्कार की घड़ी फ़ातिहा पढ़ते शाहरुख़ ख़ान और प्रणाम अर्पित करतीं गौरी ख़ान।
Om Thanvi | ओम थानवी
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Ex-Editor Jansatta, Indian Express Group | Author 'Muanjodaro' | Founding Vice Chancellor Haridev Joshi University of Journalism & Mass Comm., Jaipur
Delhi NCR/Jaipur
Joined February 2010
- 1947 में ‘भीख’ मिली; 2014 में ‘आज़ादी’; 2021 में पद्मश्री!
00:00 - भारत जोड़ो यात्रा के सौ दिन होने पर दौसा में @RahulGandhi से मिलकर मैंने भी अपना समैक्य भाव ज़ाहिर किया। चलते हुए बातें हुई। यात्रा की विशेषता है कि वह सामाजिक-सांस्कृतिक तेवर लिए हुए है; हिंसा और सांप्रदायिकता से देश में आई टूटन के प्रति लोगों को जागरूक होने का आह्वान करती है।
- यह है साहस की पत्रकारिता। संदीप चौधरी @sandeep_news24 जैसे लोग हमारे मीडिया में कितने हैं जो भीड़ के मानस की परवाह न कर हल्ले का दूसरा पहलू भी देख पाते हैं?
00:00 - एक पत्रकार से निपटने के लिए पूरा चैनल ख़रीद डाला। जब संस्थाएँ ही ढह रही हों — ढहाई जा रही हों — एक चैनल के ढहने-ढहाने पर क्या रोना। #NDTV #RavishKumar #adani
- विश्वगुरु को बेरोजगार की पाती ... नेहा सिंह की एक और धूम
- पीएम को वेश पसंद है! डेनमार्क में रहनुमाई। विकासशील देश का दर्जा तक खो चुके भारत के प्रधानमंत्री ने पहले ही दिन दो बार वेशभूषा बदली, जबकि विकसित देश की मेजबान प्रधानमंत्री सुबह से शाम एक ही पहनावे में रहीं। फोटो साभार @ANI (जारी ब्योरा 3 मई, पहला फोटो 03:40pm; दूसरा 08:26pm)
- क्या कहा रजत जी, कलाकार ने सुंदर चित्रण किया है? इसमें कला कहाँ है? किसी भक्त ने बस मोदी को बड़ा और राम को छोटा किया है। राममंदिर अभियान शुरू से राजनीतिक था। भूमि-पूजा के साथ वह व्यक्ति-पूजा में तब्दील हो गया है।कुछ ही देर में नरेंद्र मोदी राम मंदिर के भव्य निर्माण के लिए भूमि पूजन करेंगे. किसी कलाकार ने इसका सुंदर चित्रण किया है. @narendramodi
- के. चंद्रशेखर राव में जान है। आगे-आगे देखिए।
- रवीश का यह वीडियो मीडिया के इतिहास में दर्ज होगा।… यूट्यूब पर रवीश कुमार ऑफ़िशियल: “जिस दौर में जज को ही डर लगता हो, पत्रकार की क्या बिसात। मगर एक डरा हुआ पत्रकार मरा हुआ नागरिक पैदा करता है। .. मेरे रास्ते निश्चित नहीं, पर हौसला निश्चित है।” youtu.be/G9K9vpGTofo via @YouTube
- कमाल ख़ान पर कल हज़ारों ट्वीट और फ़ेसबुक नमन सामने आए। एनडीटीवी ने स्वाभाविक ही उन्हें ख़ूब याद किया, रवीश का तो शो कमाल पर केंद्रित था। मगर एक संजीदा और सरोकारी पत्रकार की मौजूदगी से इस तरह वंचित होने की तल्ख़ी को क्या अन्य चैनलों ने उल्लेख भर भी कवर किया? देखा हो तो बताइएगा।









