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वेद के वेदत्व और उसकी सर्वाङ्गपूर्णता पर न केवल भारतीय विद्वान अपितु पाश्चात्य जगत् भी मोहित एवं मुग्ध है। जिन्होंने विमल वैदिक ज्ञान के अन्वेषण में अपना समय, श्रम, और शक्ति व्यय की है, उन सभी व्यक्तियों ने वेद के अलौकिक ज्ञान की प्रशंसा भी की है।
यहाँ कुछ सम्मतियाँ दी जाती हैं:-






