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भीड़ मुझे घेर लेगी और मेरे सिर पर तमंचा रख देगी तो शायद मैं भी कहूंगा "जय श्री राम" पर वो आवाज़ मेरी न होगी तब राम भी वह नहीं होगा जो मरते वक्त गांधी के मुंह से निकला था। इस देश का हर मुसलमान मेरा भाई-बहिन है और तुम मुझे उनके खिलाफ खड़ा करने के लिये राम का इस्तेमाल नहीं कर सकते।
पश्चिम बंगाल में लोकतन्त्र को कूड़ेदान में डालकर, हिंसा और आतंक का सहारा लेकर पंचायत चुनावों में कब्ज़ा करने वाली ममता बनर्जी अभी कर्नाटक में लोकतन्त्र की दुहाई दे रही हैं। ये हास्यास्पद नहीं शर्मनाक है।
न्यूज़ टीवी पर एक धागा
1) बात 2001 की है जब ढाई साल के अनुभव के बाद मैं टीवी टुडे नेटवर्क के चैनल @aajtak में नौकरी करने गया। ट्रेनिंग के हिसाब से यह मेरे जीवन का टर्निंग पॉइंट था। लाइव न्यूज़ का दबाव झेलना और ख़बर लिखना मैंने वहीं सीखा। वह आजतक का स्वर्णिम दौर था। (जारी) ...
नौकरी छोड़कर सम्मान से जीना मुश्किल है लेकिन नामुमकिन नहीं है।
1)कम्फर्ट ज़ोन से बाहर आना पड़ता है। (ये सबसे कठिन फैसला है)
2)सीनियर रिपोर्टर होने का अहंकार छोड़ना पड़ता है
3)मल्टी टास्किंग का हुनर चाहिये
4)कम खर्च में जीना सीखना पड़ता है
ज़्यादातर लोग रिस्क लेने से डरते हैं
मैंने करीब 16 साल एनडीटीवी में काम किया और इस दौरान अक्सर कमाल से बात होती रही और फील्ड में मुलाकात भी. खालिश राजनीतिक रिपोर्ट्स में कविता खोज निकालना और शेरो शायरी से अपनी रिपोर्ट का समापन करना तो उनके प्रशंसकों को याद है लेकिन +
देश के सबसे बेहतरीन डॉक्टरों में से एक @shahalam13 का बेहद शालीन जवाब। एम्स के शाह आलम ख़ान को कौन नहीं जानता? इनके न जाने कितने साथी होंगे पर यहीं एक और बेहतरीन नाम है डॉ कामरान फारूकी.. कभी ज़रूरत पड़े तो फोन कर लेना @actormanojjoshi जोशी जी। ये मज़हब देख कर मदद नहीं करते।
रवीश पत्रकारिता जगत का स्टार है। वह किसी न किसी प्लेटफॉर्म पर जगमगाता रहेगा। मुझे अभी एनडीटीवी के उन साथियों की अधिक फिक्र है जो काबिल तो हैं पर उनका कद वैसा नहीं। ये लोग आज रात अपने भविष्य को लेकर व्याकुल होंगे। मैं निजी अनुभव के आधार पर उनसे कहना चाहता हूं डर के आगे जीत है।
We both don't believe in numbers but sharing this picture to say that Madhulika scored 100/100 in German language and 98% overall.
She said: ich liebe dich, Vati
So I said happily
"जा जी ले ज़िन्दगी"
She has decided to study humanities. ❤️
#Class10
घाटी से कश्मीरी पंडितों का दोबारा पलायन हो रहा है तो वहां की बहुसंख्य मुस्लिम आबादी क्या कर रही है? उन्हें मानव श्रंखला बनाकर उन्हें रोकना चाहिये। उनकी रक्षा करनी चाहिये। उनके साथ खड़ा होना चाहिये। यही कश्मीरियत है। सरकार का यह काम ज़रूर है लेकिन उससे उम्मीद करना बेकार है।
लोगों ने कोविड जैसी महामारी देखी, केदारनाथ आपदा देखी, तुर्की का भूकंप देखा। यहां भगवान नदारद था केवल विज्ञान, अस्पताल, दवायें और टेक्नोलॉजी ने बचाया लेकिन मन्दिर, मस्जिद और ईश्वर अल्लाह के नाम पर पगलाये लोगों की कमी नहीं है। इन्हीं के दम पर प्रचंड मूर्खों की दुकान चलती है।
टीवी में 20 साल की नौकरी छोड़कर पिछले करीब दो साल के फ्रीलांस (स्वतंत्र) लेखन के बाद जिस एक शब्द के लिये मेरे दिल में सबसे अधिक सम्मान बढ़ा है वह है - रिसर्चर
मास्टर कार्ड का विज्ञापन याद आ रहा है।
"कुछ चीज़ें पैसों से नहीं खरीदी जा सकतीं।"
वैसे ही गोयनका साहब के लिये तमीज़ किसी (मास्टर) कार्ड से नहीं खरीदा जा सकता।