जॉन साहब की ये पंक्तियां मुझ पर सही बैठती है -
तुम जब आओगी तो खोया हुआ पाओगी मुझे
मेरी तन्हाई में ख़्वाबों के सिवा कुछ भी नहीं
मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हें
मेरे कमरे में किताबों के सिवा कुछ भी नहीं
इन किताबों ने बड़ा ज़ुल्म किया है मुझ पर?
#books #booksales
हर्षित धर्मराज
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एकता अखंडता स्थापित करने की कोशिश
अखंड भारत
Joined March 2024
- एनकाउंटर, शासनिक हत्या का साधन बन गया है। अब भारतीय संविधान के अनुच्छेद-21 में प्राप्त "जीवन की आजादी" का कोई महत्व नहीं रहा है , मानवाधिकार जैसे कोई अधिकार बचे नहीं,राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग बिना दाँत और नाखून की संस्था है , जो सिर्फ़ जाँच के आदेश देती है .
- Replying to @mukeshdeshkaसर हमे नीला चिह्न लेना है और हमारे अभी 150 भी नहीं हुए
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