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"मैं शून्य हूँ…"
राहुल गांधी से पहले भी कई बार मुलाक़ात हुई थी।
लेकिन इन 4 घंटे 30 मिनट में जाना —
राहुल गांधी वो नहीं हैं, जो हम अब तक समझते रहे हैं।
इस मुलाक़ात में
धर्म था…
योग था…
राजनीति थी…
अध्यात्म था…
और सबसे महत्वपूर्ण —
प्रेम था।
वो प्रेम, जो बिना बोले भी संवाद











