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बेटा, जामा मस्जिद में खड़ा हूं और गुरबाणी का पाठ कर रहा हूं। हम सिख और मुसलमान एक ही अकाल पुरख को एक ही अल्लाह को मानने वाले हैं।
हम सिखों हिन्दू भाइयों की तरह ना मूर्ति पूजते हैं ना हवन करते हैं। ना कोई व्रत में में विश्वाश रखते हैं ना किसी कर्मकांड पाखंड में।
और बोल क्या पूछना
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तुम्हारा भरोसा तारीफ के काबिल है !
एक बार बस किसी शहर की जामा मस्जिद में ग्रन्थ साहब का पाठ करवा दो बिना मूंछ के दाढ़ी वालों से यारा , सबके मुँह बंद हो जाएंगे !
दम लगा के हईशा!






