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है चंद्रमा की रश्मियां ललाट जिनका धो रही,
हैं जिनके केश मध्य स्वयं भागीरथी सो रहीं
हैं नाग जिनके हार और त्रिपुंड जिनके भाल है
हैं पर्वतों में वास और छटा सजी विशाल है
हैं जिनके पुत्र एक दंत, वाम जिनके कालिका
कि जिनकी शक्ति है विनाश और वो ही पालिका
बसा है भाव में ये प्राण जिनके





