लल्लनटॉप या इंडिया टुडे ग्रुप के कई लोगों के पास मेरा नंबर है (सौरभ के पास भी), ट्विटर, फेसबुक, ईमेल, व्हाट्सएप्प में हमारी बातचीत भी है।
सबको सच्चाई पता है लेकिन मजाल क्या जो कोई मैसेज में ही कह दे कि गलत हुआ है।
चट से "पत्रकार" और चट से "एम्प्लॉई" बनते हैं ये लोग