Replying to @ajeetbhartiभैया मैंने इन्हे सुनने के बाद अपने नित्य पाठ में सुधार कर लिया है
1.शंकर स्वयं केसरी नंदन,
तेज प्रताप महा जग वंदन।।
2.सब पर राम राय सिर ताजा,
तिनके काज सकल तुम साजा।।
3.और मनोरथ जो कोई लावे,
तासु अमित जीवन फल पावे।।
4.यह सत बार पाठ कर जोई,
छूटहि बंदि महा सुख होई॥