मज़दूरी
_______
जिनके लिए कहा गया था
मज़दूरी पसीना सूखने से पहले मिल जानी चाहिए,
समंदर उनके पसीनों से बने हैं।
घर की रसोई में
उसी समंदर का
डब्बा बंद नमक रखा है।
सभ्यताओं के आरम्भ से
निर्वासित समंदरों की यह सांद्र खेप
संस्कृति की रोटी पर
चुटकियों से बुरककर खायी जा रही है
समाज उन्हें मर्दाना कहता है।*
_______________________________
जो राजाओं के युद्ध से लौटने का इंतज़ार नहीं करतीं
उनके पीछे जौहर नहीं करतीं,
बल्कि निकलती हैं संतान को पीठ पर बांधकर,
तलवार खींचकर रणभूमि में
समाज उन्हें मर्दाना कहता है!
जो थाली में छोड़ी गई जूठन से संतोष नहीं
माएँ युद्ध पर
___________
अगर माएँ युद्ध पर जातीं
तो युद्ध बीते युगों की बात होते।
बन्दूकें जो युद्ध के अनिवार्य उपकरण हैं
बेचे जा चुके होते
किसी पबनी पर किसी कबाड़ी को
और बदले में ले ली गयी होतीं
चार कच्ची नाशपाती या पाव भर नमक।
जब भेजा जाता उन्हें सरहदों पर
वे पूछ बैठतीं
रोटियाँ
__________
रोटियों की स्मृतियों में आँच की कहानियाँ गमकती हैं।
अम्मा बताती हैं,
सेसौरी के ईंधन पर चिपचिपाई सी फूलती हैं रोटियाँ
सौंफ़ला पर सिंकी रोटियाँ धुँवाई; पकती हैं चटक-चटक
नीम के ईंधन पर कसैली सी, करुवाती हैं रोटियाँ
पर, अरहर की जलावन पर पकती हैं भीतर-बाहर
Intellectual freedom depends upon material things. Poetry depends upon intellectual freedom. And women have always been poor, not for two hundred years merely, but from the beginning of time.”
- Virginia Woolf