नेताओं का क्या कहना,
हर जुबां पर उनके वादों का ही गहना।
चुनाव से पहले हर गली में दस्तक देते हैं,
और चुनाव जीतते ही, जनता को भूल बैठते हैं।
"हम विकास लाएंगे," ऐसा हर बार कहते हैं,
पर सड़कों पर गड्ढे और बिजली के वादे दबे रह जाते हैं।
कभी किसान का दर्द सुनते हैं, तो कभी
📈राजनीति का तमाशा📈
नेता जी बोले, "हम बदलेंगे देश,
हर गली में लाएंगे तरक्की का संदेश।"
पर चुनाव खत्म होते ही जो सीन बना,
नेता जी खुद बदल गए, देश वही का वही बना।
वादे थे बड़े, सपने थे खास,
मुफ्त की बिजली और पानी का था विश्वास।
पर बिल देखते ही जनता ने पूछा,
"ये तो
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यह कैसी राजनीति है, ये कैसे नेता हैं?
शब्दों में ज़हर, विचारों में ठगपन है।
गाली को हथियार बनाए जो भाषण में,
सम्मान कहाँ, बस अपमान हर क्षण में।
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विरोध की आवाज़ को कुचलने की जिद,
लोकतंत्र की मर्यादा को रौंदते निरंतर,
जो सत्ता के
🪔 एकता का दीप 🪔
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जाति-धर्म के नाम पर क्यों ये दीवारें उठती हैं,
नफरत की आग में क्यों ये बस्तियाँ जलती हैं?
सियासत की चालें हमको लड़वाने आई हैं,
भाई को भाई से जुदा करवाने आई हैं।
मंदिर-मस्जिद के झगड़े में हम इंसान खो रहे,
सत्ता के मोहरे बनके अपनों को
🪷🪷🪷सच्चा सम्मान🪷🪷🪷
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🌿चौक पर खड़ा बेटा सबसे कहता, 🔊
🌿"माँ-बाप तो भगवान समान हैं!"
🌿पर घर के कोने में बैठी वो माँ,
🌿आँखों में लिए अरमान हैं...🥰
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🍀महंगे उपहारों से सेवा जताई,
🍀फोटो खिंचवा कर सबको बताई। 📸
🍀पर जो रातों को