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आ सोलह श्रृंगार करूं,मैं
आ तुमको, प्यार करूं,मैं
घर से निकल कर सीधी सड़क पर,
चौवाड़े से दायीं, मुड़ जाना
वह जो गंगा तट है देखो
ऊपर एक मंदिर है,पुराना
उसके पीछे पीपल का वृक्ष,
जाने मन तुम,वहीं आ जाना
आन तुम छिप-छिप कर आना,
आना,नजरें चार करेंगे,
मधुवन का श्रृंगार बनेंगे













