आज़ हम इनके लिए नहीं लिखेंगे तो कल ये हमारे लिए क्यों लड़ेंगे?
भ्रष्टाचार के खिलाफ ये लाठियां क्यों खाएंगे?
क्यों भूखे प्यासे रहेंगे? क्यों कैंडल मार्च करेंगे?
इस क्यों का कोई जवाब है???
#विकास_जाखड़_को_रिहा_करो
#विकास_जाखड़_को_रिहा_करो
Sulender Bijarniya Suratgarh
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༺꧁🚩जय श्र᭄ व᭄र तेजाज᭄🚩꧂༻
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Suratgarh, India
Born December 1
Joined September 2020
- बताओ मोरिया कब। कहां। किसने और किसका बोलाया था। @JATbera1 @do @SangitaBishno1 @Siya7232 #पेपर_लीक_भजन_सरकार_वीक #पेपर_लीक_भजन_सरकार_वीक #पेपर_लीक_भजन_सरकार_वीक
- Replying to @Patrickmatex and @kapilpilaniya1यह बात बिल्कुल सही है। हमारी ताकत और क्षमताएं अक्सर तब सामने आती हैं जब हमें कोई और रास्ता नहीं दिखता। यह स्थिति हमें अपने आप को पहचानने और अपनी सीमाओं को तोड़ने के लिए मजबूर करती है। जैसा कि कहा जाता है, “जब तक जरूरत न पड़े, हम अपनी असली ताकत को नहीं जान पाते।” यही वो पल होता है
- लोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं मय-कदा ज़र्फ़ के मेआ'र का पैमाना है ख़ाली शीशों की तरह लोग उछलते क्यूँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँ हैं नींद से मेरा तअल्लुक़ ही नहीं बरसों
- ‘’क्या हार में, क्या जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं। कर्तव्य पथ पर जो भी मिला, यह भी सही वो भी सही, वरदान नहीं मांगूंगा, हो कुछ पर हार नहीं मानूंगा।’’
- Replying to @Shivsa09हर सुबह एक नई उम्मीद जगाए, खुशियां आपके दर पर दस्तक दे जाए। सुप्रभात
- Replying to @SUNILKASWAN79समय प्रबंधन का प्रण दीपावली के पावन पर्व पर कोई अच्छा प्रण लेने का विचार वाकई में उत्तम है। यहाँ कुछ प्रण हैं जो आप ले सकते हैं: 1. **ज्ञान की खोज का प्रण** - हर दिन कुछ नया सीखने का संकल्प लें। यह किताब पढ़ने, कोर्स करने, या नए कौशल सीखने से जुड़ा हो सकता है。 2. **स्वास्थ्य
- किताबे हो या अरमान सामने वाले को कद्र ना हो तो रद्दी ही होता है…..!
- Replying to @tejalkripaआपने जिस शब्द का वर्णन किया है, उसे हिंदी में "कच्चा हीरा" या अंग्रेजी में "Rough Diamond" कहा जा सकता है। यह शब्द उन लोगों के लिए प्रयोग किया जाता है जो बाहरी रूप से साधारण या अमूल्य लग सकते हैं, लेकिन उनमें असाधारण प्रतिभा, कौशल, या गुण होते हैं जो अभी प्रकट नहीं हुए हैं। यह
- तुम्हे नाम लिखूं या बेनाम लिखूं.... खत लिखूं या पैगाम लिखूं हंसी लिखूं, या गुमनाम लिखूं तुम ही बताओ, तुम्हे क्या लिखूं तुम्हें अक्स लिखूं, या ब्रह्मांड लिखूं इकाई लिखूं, या अक्षरों का सार लिखूं तुम्हें प्रेम लिखूं या प्रेमियों का आस लिखूं तुम्ही बताओ तुम्हें दूर लिखूं या पास
- Replying to @BaindhaRajeshलोग हर मोड़ पे रुक रुक के सँभलते क्यूँ हैं इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यूँ हैं मय-कदा ज़र्फ़ के मेआ'र का पैमाना है ख़ाली शीशों की तरह लोग उछलते क्यूँ हैं मोड़ होता है जवानी का सँभलने के लिए और सब लोग यहीं आ के फिसलते क्यूँ हैं नींद से मेरा तअल्लुक़ ही नहीं बरसों
- Replying to @tejalkripaयह एक सुंदर और प्रेरणादायक कविता है जो भाईचारे और प्रेम के महत्व को उजागर करती है। कविता में व्यक्त किए गए विचार सामाजिक सद्भाव और एकता को बढ़ावा देते हैं। यहां एक छोटा सा विश्लेषण है: - **पहली पंक्ति** बताती है कि भाईचारा दुनिया में खुशियों का संचार करता है। - **दूसरी पंक्ति**
- मुस्कुराहट वो हीरा है... जिसे आप बिना खरीदे पहन सकते हैं, और जब तक ये हीरा आपके पास है, आपको सुंदर दिखने के लिए किसी चीज़ की जरूरत नहीं..!! 💯
- Replying to @tejalkripaHenrich klassen retained by Hyderabad franchise INR 23 Cr मौज कर दी हैदराबाद ने तो #IPL2025 #klassen #IPLAuction



