कल इलाहाबाद हाईकोर्ट से दो खबरें आईं
1 - पत्रकार सिद्दीक कप्पन की ज़मानत याचिका खारिज कर दी गई
2 - हत्या, रंगदारी समेत कई मामलों के आरोपी बृजेश सिंह को जमानत दे दी गई
नहीं रहा एक और पत्रकार...
नीचे बाईं ओर जो शख्स दिख रहे हैं, वो हैं छत्तीसगढ़ के पत्रकार मुकेश चंद्राकर।
मुकेश उन कुछ पत्रकारों में से एक थे, जो दो सालों पहले बस्तर के जंगलों में गए। फिर नक्सलियों के चंगुल से CRPF के जवानों को छुड़ाकर ले आए।
कुछ दिनों पहले एक सड़क की क्वालिटी
प्लीज़, पवन जायसवाल की मदद करिए.
पवन ने 2019 में मिर्ज़ापुर के स्कूल की पोल खोली थी, जहां बच्चों को खाने में रोटी-नमक दिया जा रहा था. प्रशासन ने तब पवन पर ही केस कर दिया था.
पवन को कैंसर हो गया है. उन्हें इलाज वास्ते पैसे चाहिए.
अगले ट्वीट में अकाउंट डीटेल. मदद करिए.
"जब बुलडोजर आया तो मैं सो रहा था"
"बहुत तेज हल्ला हुआ तो मेरी नींद खुली"
"पापा की सिगरेट, गुटखे, कोल्ड ड्रिंक की दुकान थी"
"बुलडोजर ने दुकान को तोड़ दिया"
"मैं गुल्लक में रखे हुए पापा के पैसे उठा रहा था"
ध्वंस में से पैसे बीनते आसिफ़ की फ़ोटो वायरल हुई थी. ये उसका बयान उसी का.
प्रिय छात्रो,
अगर आपको लगता है कि हमें अपशब्द कहकर, हमें धमकाकर, हमें मजबूर करके आप हमसे अपनी कहानी कहलवा लेंगे, एक खबर करवा लेंगे तो सॉरी. बात कही-लिखी जाएगी, लेकिन अभद्रता के डर से नहीं.