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‘जो उचित समझो, वो करो.’
But the story is far more sinister.
And it doesn’t end there.
वो ढाई घंटे, नरेंद्र मोदी का एक ब्रह्मवाक्य…मगर कहानी सिर्फ़ इतनी नहीं है। इससे आगे की कहानी इतनी भयावह है कि देशभक्ति की धज्जियाँ उड़ती नजर आएँगी…और सच्चे देशभक्तों का खून खौल उठेगा…देखिए:-
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