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1999 में बाबाओं की झाड़ फूंक ने मुझे मृत्यु शैय्या में पहुँचा दिया था तब सतना के बिरला अस्पताल में भर्ती किया। खून न मिलने से ऑपरेशन नहीं हो रहा था तब सफ़ाई कर्मी संतु मास्टर ने ब्लड दिया। 26 साल बाद खोजा तो वो इस दुनिया में नहीं थे। हमने संकल्प लिया है कि बेटी का कन्यादान करेंगे
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