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यथा शरीरं क्षीयमाणं क्षीयते चेतना यत्र
नित्यं नान्यत् शरीरं ध्रुवं यथा देहिनैवमेवं
नित्यं नयेनास्ति न भवेच्चा
जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र को त्यागकर नए वस्त्र धारण करता है उसी प्रकार आत्मा भी पुराने शरीर को त्यागकर नए शरीर में प्रवेश करती है....
#जय_श्री_कृष्ण 🌺🙏🏻💖















