कैलेंडर में तारीख एक एक कर बीत रहा है, घड़ी की सुई टिक टिक कर धीरे धीरे गुजर रही है और गुजर रहा है उसके साथ ढेर सारी उम्मीदें।
जब यह साल शुरू हुआ था तो ऐसा लगा जैसे यही तो चाहते थे और जैसे जैसे कैलेंडर में दिसंबर की ओर बढ़ रहे हैं, लग रहा की इससे बत्तर कुछ था ही नहीं।