बिहार के किसी कोचिंग संचालक ने छात्रों को हिंसा के लिए ना उकसाया है, ना भड़काया है!
तानाशाही कानों को अफवाहों पर जल्दी विश्वास होता है, अपने गिरेबाँ में झाँकने पर दिखने वाले सच पर नहीं!
संवेदनहीन सरकार अगर तुरंत वार्ता करती और पुलिस बेवजह बर्बर नहीं होती तो छात्र हिंसक नहीं होते!