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> "फ्लाइट में बैठ गया हूँ... संविधान की किताब लेकर आ रहा हूँ... मेरी माँ रो रही थी... मैं ऐसा कर दूँगा, वैसा कर दूँगा..."😆😆
और फिर...
दोपहर के 3 बजते ही क्रांति का पूरा संविधान पसीने में बह गया! 😆
जो सुबह तक सत्ता हिलाने निकले थे, शाम होते-होते खुद AC की शरण में दिखाई दिए।








