@AnupamPKher saab. ये ग़ज़ल मेरी है, आपने पढ़ी पोस्ट की शुक्रिया, लेकिन आपको मेरा नाम भी देना चाहिए, मैं एक्टर नहीं शायर हूँ, मेरी शायरी ही मेरा चेहरा है 🙏
ख़ुदको इतना भी मत बचाया कर
बारिशें हों तो भीग जाया कर
काम ले कुछ हसीन होंटों से
बातों बातों में मुस्कुराया कर
चांद लाकर कोई नहीं देगा
अपने चेहरे से जगमगाया कर
धूप मायूस लौट जाती है
छत पे कपड़े सुखाने आया कर
कौन कहता है दिल मिलाने को
कम से कम हाथ तो मिलाया कर
- शकील आज़मी
हर घड़ी चश्म-ए-ख़रीदार में रहने के लिए
कुछ हुनर चाहिए बाज़ार में रहने के लिए
अबतो बदनामी से शोहरत का वो रिश्ता है कि लोग
नंगे हो जाते हैं अख़बार में रहने के लिए
मैं ने देखा है जो मर्दों की तरह रहते थे
मसख़रे बन गए दरबार में रहने के लिए
- शकील आज़मी
میں نے دیوار پہ کیا لکھ دیا خود کو اک دن
بارشیں ہونے لگیں مجھ کو مٹانے کے لئے
شکیل اعظمی
मैंने दीवार पे क्या लिख दिया ख़ुदको इक दिन
बारिशें होने लगीं मुझको मिटाने के लिए
- शकील आज़मी
जान दे सकता है क्या साथ निभाने के लिए
हौसला है तो बढ़ा हाथ मिलाने के लिए
इक झलक देख लें तुझको तो चले जाएंगे
कौन आया है यहां उम्र बिताने के लिए
- शकील आज़मी
ख़ुदा पे छोड़ा दुआओं से घर नहीं बांधा
सफ़र पे निकले तो रख़्ते-सफर नहीं बांधा
कमाया जैसे उसी शान से उड़ाया भी
कभी भी नोट पे हमने रबर नहीं बांधा
- शकील आज़मी
बादलों की तरह बारिश की कहानी में रहो
तुम मिरा ग़म हो मिरी आंख के पानी में रहो
ये नई दिल्ली तुम्हें रास नहीं आएगी
लौट कर आओ मिरी जान पुरानी में रहो
- शकील आज़मी
चल पड़ूंगा तो बहोत दूर निकल जाऊंगा
वक़्त ठहरा है अभी आके मना ले मुझको
शोर इतना भी नहीं है कि तुझे सुन न सकूं
दे के आवाज़ मिरे यार बुला ले मुझको
- शकील आज़मी
मैं भी तुम जैसा हूं अपने से जुदा मत समझो
आदमी ही मुझे रहने दो ख़ुदा मत समझो
ये जो मैं होश में रहता नहीं तुमसे मिल कर
ये मिरा इश्क़ है तुम इसको नशा मत समझो
- शकील आज़मी
कल हवा में बिखर गया था मैं
फिर न जाने किधर गया था मैं
वो था इक ख़त्म होते रस्ते सा
उसपे चलकर ठहर गया था मैं
देर तक उसका इन्तेज़ार किया
फिर अकेला ही घर गया था मैं
जब कहीं भी मुझे जगह न मिली
अपनी आंखों में भर गया था मैं
- शकील आज़मी