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ख़ुदा की इबादत से भी ज़्यादा तुझसे मोहब्बत की मैंने,
दिल की हर दुआ में बस तेरा ही नाम रखा मैंने।
जहाँ में जब भी उठी थी उम्मीद, तेरा रूप वहीं चमका,
रातें मेरी तेरे ख्वाबों के साये से सुबह तक महकी
मेरा इश्क़ उस हद तक बढ़ा कि खुदा भी शरमा गया
शायद इसी नाज में उसने मेरे हिस्से में
हम तो बस यूँ ही पलकों पे सजाते हैं तेरी यादें
कभी हँसी बन के दिल में कभी ख़्वाबों में आती हैं यादें
चाहे सफ़र हो तन्हा, चाहे हों महफिलें
इन्हीं के सहारे कटते है दिन और रात को याद आती है यादे
किसी की बातें जब भी हों खुशबू सी रह जाती हैं यादें
टूटे हुए टूटे पल भी फिर हँस के
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