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हिन्दू होना और आधुनिक सन्दर्भ में लोकतांत्रिक होना एक है। इसे ऐसे भी समझिए कि, हिन्दू धर्मग्रंथों पर निरंतर चर्चा, समीक्षा, विवेचना, व्याख्या हो सकती है और भारतीय संविधान पर भी, लेकिन हिन्दू धर्मग्रंथों की तरह किसी और की हो सकती है ? यही फर्जी सेक्युलर चर्चा का संक्षिप्त उत्तर है



