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बहिन जी ने चंद्रशेखर को बुलाकर अगर एक बार ही बात की होती तो आज चंद्रशेखर बसपा में होता। सभी जानते हैं कि चंद्रशेखर बसपा के लिए काम करना चाहता था तथा बहिन जी को अपना नेता भी मानता था ऐसा उसने मीडिया में भी बोला था लेकिन बहिन जी तो उसे सुरु से ही नापसंद करतीं आ रहीं थीं।

