Pinned
रेगिस्तान की रेत पर लकीर बनाती चली गई,
सीटी की आवाज़ में कोई कहानी सुना गई।
जहाँ दूर-दूर तक बस खामोशी का राज था,
वहीं ट्रेन की रफ्तार में जीवन का आवाज़ था।
रेत के टीलों से टकराती हुई पटरियों की तान,
रेगिस्तान भी सुन लेता है तरक्की की पहचान।
00:00








