'रामचरित' का अर्थ है राम का चरित्र। मानस मन को, अंतःकरण को कहते हैं। अतः रामचरितमानस का तात्पर्य राम के उस चरित्र से है जो मन के अन्तराल में है हम अपने तर्कों कुतर्कों से केवल दिग्भ्रमित हीरहेंगे। अतः किसी आत्मज्ञानीमहापुरुष के श्रीचरणों में बैठ कर ही सीखा जाय तभी कल्याण होगा।