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प्रिय साथियों,शुभचिंतकों एवं मेरे अपने जनों,
9 अक्टूबर मेरे जीवन का सबसे कठिन और असहनीय दिन बन गया,
जब मेरा लाडला पुत्र हनुमंत सदा के लिए मुझसे दूर चला गया।
एक पिता के रूप में यह पीड़ा शब्दों से कहीं गहरी है —
यह ऐसा घाव है, जो शायद जीवनभर नहीं भर पाएगा।
पर इस अंधेरे दुःख के











