वहां पर कानून का डंडा इतना कठोर व भारी है कि पत्थर उठाने से पहले ही हाथ तोङ दिया जाता है। नही तो भारत से पत्थर फैकने वाले ही मक्का मदीना जाते है, कावङ लाने वाले नही।
अमेरिका किसी का सगा नही ,एक बात समझने लायक है कि किसी का मोहरा बनना अपने पैरो पर कुल्हाङी मारने के समान है, पहले अमेरिका ने युद्ध के लिए उकसाया अब हाथ पिछे खिच लिए।