यही है लोकतंत्र और सभी को समानता का अधिकार। क्या यह तुष्टिकरण है या वकीलों एक गैंग को मालामाल करने के लिए दोहरे मापदंड। नूपुर शर्मा के केस मे यहीं हुआ और दूसरे प्रभावशाली धन्नासेठों की सुनवाई तुरन्त और स्थगन आदेश भी। प्रश्न तो उठेंगे और जबाब भी देना होगा