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रातें देंगी बता, नींदो में तेरी ही बात है
भूलूँ कैसे तुझे, तू तो ख्यालों में साथ है
बेख़याली में भी, तेरा ही ख्याल आए
क्यों जुदाई दे गया तू ये सवाल आए
नज़र के आगे, हर एक मंज़र,
रेत की तरह बिखर रहा है
दर्द तुम्हारा बदन में मेरे,
ज़हर की तरह उतर रहा है..
~ इरशाद कामिल





