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जिंदगी के निश्चित पड़ाव में पिछड़ा होना असल में बेहद कष्टदायक होता है .... न जाने कौन कब क्या सुना जाए ....कभी कभी हल्की सी आवाज में दबे अल्फाजों में कह देते है ....ठीक है ,और कभी कभी लफ्ज़ ही नहीं निकलते .... पर यहीं वक्त का निर्णय है यदि वक्त से पिछड़ जाओगे तो यक़ीनन... मौन को






























