कलमों से दिलों तक सफ़र करता हूँ,
दो लब्ज़ो में ज़िन्दगी के रंग भरता हूँ ✍️
Journeying from words to hearts,
Painting lifes hue in just 2 lines
तख़ल्लुस ~ शरद
जितनी वो मनचली निकली, उतना मैं भी गुनहगार था,
वो जुनून में बहकी, मैं ज़िम्मेदारी से लाचार था।
उसने दिल तोड़ दिए, मैंने अरमान छोड़ दिए,
वो चाहती थी आज़ादी, मैं फ़र्ज़ों का तलबगार था।
जल्द नया वर्ष दस्तक दे रहा,
नयी उमंग और नये सपने ला रहा।
हर दिल में है नयी उम्मीदों की बात,
नयी रौशनी से भर रहा जीवन की रात।
नयी ख्वाहिशें, नयी तमन्नाएँ संग ला रहा,
ये दिल फिर से तेरे गीत गा रहा।
तेरे संग हमदम हर लम्हा सजाना,
नये सफर में प्यार को आजमाना।