*एकता*
देवनाथ मिश्रा
सदा एकता में जो बधता
कार्य सभी उसका सब सधता।
बहुत एकता में दमखम है
मिलकर चलता अगर क़दम है।
करता है वह व्यक्ति तरक्की
जीत सदा हो जाती पक्की।
सामाजिक समरसता बढ़ता
आपस में नहि कोई अड़ता।
बहुत एकता में हैं साहस
नहीं करे कोई दुस्साहस।
अगर रहें हम सदा
उन दोस्तों के लिए जो लाईक कमेंट नहीं करते
लाइक देते हो नही,लाइक की है चाह।
अपना उल्लू साधते, मेरी नहीं परवाह।।
मेरी नहि परवाह, बहुत से यार मतलबी।
मेरे पोस्ट को देख तुरत,बनते अजनबी।।
कह देवनाथ महाराज, समझिए हमें न भिक्षुक।
लाइक के बदले लाइक का,मैं भी
आचरण का आईना
देवनाथ मिश्रा
आचरण जो रखे शुद्ध यहां
बन जाता गौतमबुद्ध यहां।
खुद का प्रतिबिंब दिखाता यह
सबसे सम्मान दिलाता यह।
डाले प्रभाव संबंधों पर
प्रामाणिकता अनुबंधों पर।
करता विकास नैतिकता से
दूरी रखता भौतिकता से।
सच्चाई जिसमें