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इस बार गणतन्त्र-दिवस पर यूजीसी ने थोड़े-बहुत बचे हुए उत्साह पर भी पानी फेड़ दिया है।
नैराश्य ने जकड़ लिया है कि भाजपा नहीं तो कौन? अन्य सब तो भाजपा से भी गए-गुजरे हैं। अब देश का क्या होगा? क्या हम वेनेजुएला बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं!!!
आवश्यकता है योगीजी, हिमन्ता दा जैसे



