आदरणीय भजनलाल जी, सड़क पर गन्ने का जूस पीने या खरबूजा खाने से फुर्सत मिल गई हो तो थोड़ा जयपुर की ओर भी देख लीजिए।
कैसे एक बच्ची को धमकाया जा रहा है, उसे अकेले अन्दर बुलाया जा रहा है।
क्या अब एक हिंदू बच्ची जयपुर की सड़कों पर रिपोर्टिंग भी नहीं कर सकती है?