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🌼 इंटरनेट से पहले… मेरा बचपन कुछ यूँ गुज़रा था 🌼
ना फोन था, ना चार्जर का झंझट,
ना डेटा पैक, ना Wi-Fi का चट-पट।
खुले आँगन में खुशियाँ बिखरी रहतीं,
हम हवा संग दौड़ें, गलियाँ कहतीं—
“आ जा, खेलेंगे आज भी वही खेल,”
कभी पिट्ठू, कभी कंचे, कभी धमाधम रेल।
गिल्ली-डंडा हमारा





