“तुलसी भरोसे राम के, निर्भय होकर सोय।
अनहोनी होनी नहीं, होनी होए सो होए।।”
Sweta Singh
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Sr Managing Editor @aajtak & @goodnewstoday fb.com/SwetaSinghAT अत्र प्रकटिताः विचाराः नैजायासंति। संस्थानं किमपि अत्रैव उत्तरदायित्वं नास्ति।
Joined January 2017
- बहुत सारों ने सचिन के संन्यास के साथ क्रिकेट देखना छोड़ा। मेरे लिए वो ओहदा @msdhoni का है। वैसे ले.कर्नल धोनी 15 अगस्त के अलावा कोई और दिन चुन भी नहीं सकते थे। #MissYouDHONI
- फ़िल्म के विरोध में ‘देख तो लो पहले’ कहने वालों ने रिलीज़ से पहले किताब पढ़ ली थी क्या?
- एक साल में दुनिया बदल गई। तब केक कम पड़ता था। आज आदमी कम पड़ गए। थोड़ा थोड़ा चख लेने में ही ज़्यादा सुख था। पर शुभकामनाएँ कम नहीं पड़ीं। बहुत बहुत धन्यवाद आप सबका 🙏
- कोरोना के समय फ़ैसला लिया था, स्टूडियो नहीं फ़ील्ड पर रहूँगी। आज 70 दिन हो गए। ऑफिस के दोस्तों से मिले हुए भी इतने ही दिन। पर खुद को आज़माने का मौक़ा भी है। “मधुबाला का राग नहीं अब, अंगूरों का बाग नहीं अब, अब लोहे के चने मिलेंगे दाँतों को अजमाओ! आगे हिम्मत करके आओ!”
- “आज भी गैंगस्टर की साँठगाँठ है। गिरफ़्तारी का ड्रामा ताकि ज़िंदा रहे। चुनाव लड़ेगा ये।” “फ़र्ज़ी एनकाउंटर! मार डाला ताकि राज़ न उगले।” चित मैं जीता, पट तू हारा वाला सिक्का भी पलट पलट के परेशान है।
- दुनिया के किसी राष्ट्राध्यक्ष को भारत के मामलों में हस्तक्षेप की अनुमति नहीं। फिर इनकी बिसात क्या है! देश का मसला देश सुलझाएगा।
- जिनको एक हफ़्ते बिना सिगनल के कष्ट है, उनमें से कितनों को तब भी तकलीफ़ होती है जब सियाचिन और सुदूर क्षेत्रों में सैनिक महीनों बिना फ़ोन और संपर्क के रहते हैं? परिवार सिर्फ़ पत्थर फेंकने वालों के नहीं, बचाने वालों के भी हैं। हौसला रखिए। सिगनल भी आएगा। और शांति भी।
- मंगलवार को जब निज़ामुद्दीन मरकज़ से रिपोर्टिंग कर रही थी तो किसी ने तुलसी का ये पौधा दिया। लाइव की वजह से धन्यवाद नहीं कह पाई। यहाँ ट्विटर पर साथ हों तो... 🙏
- एक वृद्ध साधु वर्दी से उम्मीद लगाए पीछे छिपे। तो उसने खुद उन्हें भीड़ को सौंप दिया! ‘चोर समझकर’ मारने वाली पूरी रिपोर्ट मनगढ़ंत दिख रही है। ये विडियो तो प्रायोजित हत्या का है।
- ॐ असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मामृतं गमय॥ दीपों से कोरोना के कीटाणु नहीं मरेंगे। जैसे ध्वनि से वो भागते नहीं। पर दिमाग़ का विस्तार कीजिए तो ध्वनि की एकता सुनाई देगी, एकता का उजाला दिखेगा। और एकजुटता की शक्ति का अहसास होगा।
- जिस बॉलीवुड ने दशकों तक ‘सूदखोर बनिया’ ‘दुराचारी ठाकुर’ ‘पाखंडी ब्राह्मण’ जैसे अनगिनत नैरेटिव गढ़े। उसे चंद दिनों के ड्रग वाले कवरेज से इसलिए बेचैनी हो रही है क्योंकि इमेज ख़राब हो रहा है।
- माफ़ कीजिए मि लॉर्ड। ये आपकी अवमानना हो सकती है। पर दिल्ली हिंसा में एक उँगली आपपर भी उठती है। एक प्रदर्शन के लिए वार्ताकारों की फ़ौज रोज़ रोज़ मनाने जाए, तो नए नए प्रदर्शन क्यों ना पनपें?










