अकेली झील..

    Kridha Garg
    @Kridha334
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    एक झील थी, चुपचाप अकेली,

    सुनसान घाटी में फैली सुनहरी।
    हर लहर में थी एक पुकार,
    कोई आए, बाँटे उसका संसार।
    चाँद से कहती हर रात ये बात,
    "कभी तो कोई समझे मेरी बात।"