सूर्यकांत सोनी: दिल्ली से लगभग 80 किमी. दूर हरियाणा के झज्जर जिले का छोटा सा गांव सिलानी केशो इन दिनों खासा चर्चा में है। यहां खेतों के बीच विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित एक ऐसा स्कूल है, जिसने इस गांव को देशभर में एक नई पहचान दिलाई है।
इस स्कूल की शुरुआत भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे नामचीन खिलाड़ियों में से एक वीरेंदर सहवाग ने वर्ष 2011 में की थी। अपने पिता के सपने को पूरा करने के लिए सहवाग ने इस स्कूल की स्थापना की।
इस स्कूल की खास बात यह है कि यहां पढ़ने वाले बच्चों को पढ़ाई के बोझ तले ही नहीं दबाया जाता। बल्कि खेल की बारिकियां भी नियमित रुप से सिखाई जाती है।
वर्तमान में इस स्कूल में करीब 360 स्टूडेंट्स अपने भविष्य का निर्माण कर रहे हैं। छह साल के छोटे से अंतराल में इस स्कूल ने देश में अपनी विशेष और अलग पहचान बनाई है।
आइए जानते हैं सहवाग इंटरनेशनल स्कूल से जुड़ी खास बातें....
1. सहवाग ने पिता के सपने को किया पूरा:

सहवाग इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। ये सपना था जो सहवाग के पिता ने देखा था और जिसे पूरा करने में सहवाग ने कोई कसर नहीं छोड़ी।
ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं कि बचपन में सहवाग अपनी पढ़ाई और क्रिकेट कोचिंग के लिए रोजाना करीब 40 किमी. का सफर तय करते थे। जिसमें से 5 किमी. तो सहवाग को पैदल ही चलना पड़ता था।
सहवाग की इस परेशानी को देखकर उनके पिता कृष्ण सहवाग ने उन्हें कहा था कि जब वह कामयाब बन जाओ तो ऐसी स्कूल का निर्माण करना जिसमें बच्चों को पढ़ाई के साथ खेलने और रहने की सारी व्यवस्था एक ही जगह उपलब्ध हो। पिता के उसी सपने को पूरा करने के लिए सहवाग ने इस स्कूल की स्थापना की।
2. सहवाग के टेस्ट में दूसरे तिहरे शतक के बाद शुरू हुआ स्कूल बनने का सफर:
वर्ष 2008 में साउथ अफ्रीका के खिलाफ सहवाग ने टेस्ट क्रिकेट में दूसरा तिहरा शतक जड़ा था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सहवाग को झज्जर जिले में भूमि आवंटन की घोषणा की। भूमि आवंटन के 3 साल बाद अप्रैल 2011 में सहवाग ने अपने पिता के सपने को 'पंख' दिए और स्कूल की नींव रखी।
3. सचिन, धोनी जैसे खिलाड़ी भी कर चुके है स्कूल विजिट :

सहवाग इंटरनेशनल स्कूल में खेल जगत से जुड़ी कई बड़ी हस्तियां विजिट कर चुकी हैं। जिनमें क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर, दुनिया के महान कप्तानों में से एक महेंद्र सिंह धोनी और जहीर खान के नाम शामिल हैं।

इन दिग्गजों ने यहां आकर बच्चों को खेल से जुड़ी हर एक चीज़ को बारीकी से समझाया। साथ ही अपना अनुभव भी बच्चों के साथ शेयर करके इनके मनोबल को बढ़ाया।
3. सहवाग को पत्नी आरती का मिला पूरा सहयोग:
पिता के सपने को पूरा करने के लिए सहवाग ने स्कूल निर्माण के लिए काफी मेहनत की थी। आज वीरेंदर सहवाग की स्कूल इतनी ऊंचाइयों पर है। इसका श्रेय उनकी पत्नी आरती सहवाग को भी जाता है।

सहवाग स्कूल की स्थापना के बाद अपने क्रिकेट को लेकर व्यस्त रहते थे। उनके पिता के सपने को बुलंदियों पर ले जाने के लिए आरती सहवाग ने शुरू से ही स्कूल पर अपना पूरा ध्यान केंद्रित किया। स्कूल की चयरपेर्सन आरती सहवाग हफ्ते में 2-3 बार स्कूल जाकर पूरा प्रबंधन संभालती है।
4. कोटला को टक्कर दे रहा है यहां का क्रिकेट ग्राउंड:
देश में वीरेंदर सहवाग का नाम आते ही लोगों के दिमाग में क्रिकेट की बात आना लाजमी है। अब स्कूल की स्थापना सहवाग ने की है तो क्रिकेट का खेल मैदान भी होना जरुरी है। सहवाग इंटरनेशनल स्कूल का खेल मैदान दिल्ली के कोटला ग्राउंड की तर्ज पर बना है।
कोटला के पिच क्यूरेटर ने इस ग्राउंड को बनाने में अहम भूमिका निभाई है। इस स्कूल का ग्राउंड कोटला के जितना ही बड़ा है। आईपीएल में खेलने वाली दिल्ली डेयर डेविल्स की टीम भी अक्सर इसी मैदान पर अभ्यास करती है। साथ ही हरियाणा सरकार यहां हर साल खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी करवाती है।
5. हाल ही में 22 छात्रों को मिले है राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पदक:

इस स्कूल के बच्चे पढ़ाई के साथ खेलों पर पूरा ध्यान लगाते है। स्कूल के छात्रों ने राज्य के साथ देशभर की विभिन्न खेल प्रतियोगिता में 22 पदक जीतकर स्कूल का मान बढ़ाया है। स्कूल के होनहार बच्चों की जानकारी स्कूल प्रबंधन समय-समय पर सोशल मीडिया पर भी शेयर करता है।
6. क्रिकेट के अलावा अन्य खेलों पर भी दिया जाता है पूरा ध्यान :
23 एकड़ के विशाल क्षेत्रफल में फैले सहवाग इंटरनेशनल स्कूल में केवल क्रिकेट पर ही ध्यान नहीं दिया जाता। यहां क्रिकेट के साथ अन्य सभी खेलों के लिए भी विश्वस्तरीय सुविधा से लैस संसाधन और खेल के मैदान उपलब्ध है।
बात टेनिस कोर्ट की हो या फुटबॉल मैदान की, इसके अलावा 400 मी. ट्रैक हो या घुड़सवारी की सुविधा इस स्कूल में सब कुछ है। स्कूल ने स्पोर्ट्स मेन्टोर के रूप में खिलाड़ियों से टाई-अप कर रखा है। ये स्पोर्ट्स मेन्टोर BCCI और विश्व बॉक्सिंग एसोसिएशन से जुड़े है। जो समय-समय पर स्कूल का विज़िट करते है और बच्चों को आवश्यक टिप्स भी देते हैं।