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    आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ा महिलाओं का कारवां

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 04 Jan 2021 10:55 PM (IST)

    जिला विकास अधिकारी शेष मणि सिंह के अनुसार कृषि उत्पादन में भी महिलाओं ने हाथ बढ़ाया है। जिले के 25 ग्राम संगठनों के 133 समूहों के 1345 सदस्य परिवारों ...और पढ़ें

    आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ा महिलाओं का कारवां
    आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ा महिलाओं का कारवां

    सिद्धार्थनगर: जिले में आत्मनिर्भरता की दिशा में महिलाओं का कारवां बढ़ता जा रहा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े 146 महिलाओं का समूह सक्रिय है। महिलाओं ने कोरोना संकट काल में मास्क और पीपीई किट का निर्माण किया। सस्ता और बेहतरीन नेपकीन बनाया। और अब मशरूम और मुर्गी पालन में इनकी ललक बढ़ी है। भनवापुर के ग्राम पंचायत पिपरा पांडेय की एकता समूह ने भूसे से मशरूम का उत्पादन शुरू किया है तो उसका बाजार की महिमा आजीविका स्वयं सहायता समूह ने मुर्गी पालन से आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है।

    पिपरा पांडेय की माया बताती हैं कि ट्रेनिग के बाद पहली बार मैंने 50 किलो भूसे से मशरूम लगाया। पहली ही बार में चार किलो मशरूम निकला है। अब बड़े पैमाने पर इसे करने की योजना बना रही हूं। डुमरियागंज के भग्गोभार की महिलाएं भी मशरूम की खेती में हाथ बढ़ाया है। सुनीता गुप्ता और रेश्मा अग्रहरि बताती हैं कि अभी मशरूम की खेती शुरू की हैं। कितना फायदा होगा, इसका अभी कोई हिसाब नहीं है। खेसरहा के कुनैना की बुद्ध आजीविका स्वयं सहायता समूह की कमलावती का कहना है, उनका समूह मुर्गी पालन शुरू किया है। समूह से तीस हजार का लोन लिया। दस महीने पहले काम शुरू हुआ है। इस समय पूंजी करीब पचास हजार के करीब है। मंडी के हिसाब से रेट रहता है। कभी सौ रुपये किलो तो कभी नब्बे रुपये। इस कार्य में है महिलाओं का योगदान

    होटल संचालन, मास्क-पीपीई किट निर्माण, प्रेरणा कैंन्टीन, सिलाई-कढ़ाई, सब्जी उत्पादन, सब्जी बिक्रेता, स्कूल ड्रेस, फर्नीचर, कपड़े की दुकान, धान कुटाई मशीन,पान की गुमटी आदि कृषि उत्पाद में भी महिलाओं ने बढ़ाया हाथ

    जिला विकास अधिकारी शेष मणि सिंह के अनुसार कृषि उत्पादन में भी महिलाओं ने हाथ बढ़ाया है। जिले के 25 ग्राम संगठनों के 133 समूहों के 1345 सदस्य परिवारों को सब्जी एवं अन्य कृषि उत्पाद के पैदावार के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। इन महिलाओं को सरकार द्वारा दो लाख रुपये तक के कृषि संयंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे। 18 सब्जी उत्पादक समूहों का गठन किया गया है। जिससे जुड़ी 315 सदस्यों द्वारा सब्जी उत्पादक एवं मार्केटिग का प्रयास हो रहा है। अब तक सात सब्जी उत्पादक समूह को डेढ़ लाख प्रति समूह के हिसाब से कृषि संयंत्र खरीदने के लिए वित्तीय सहायता भी दी गई है। अगले वर्ष मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए महिला समूहों को जोड़ने की योजना बनाई गई है। इस योजना से करीब दो हजार महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकेंगी। रसायनिक एवं कीटनाशक दवाओं से बचने के लिए कुछ महिलाओं ने जैविक दवाओं जैसे बिज मृत, पंचामृत बनाने का भी प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें 162 कृषि एवं पशु आजीविका सखी का चयन किया गया है, जो पशु पाठशाला का भी संचालन करेंगी। एक-एक समूह में ग्यारह महिलाएं जुड़ी हैं। कोरोना संकट काल में 146 महिला समूहों ने मास्क, पीपीई किट का निर्माण कर स्वावलंबी बनी हैं। एक महिला समूह ने सेनेट्री नेपकीन बनाने की फैक्ट्री डाल दी है। अब तक जिले में 5800 महिला समूह का गठन किया जा चुका है। समूह से 63800 महिलाएं जुड़ी हैं। इन्हें स्वावलंबी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास हो रहे हैं।