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    मीरजापुर में समूह की महिलाओं द्वारा तैयार एलइडी से जगमग होगा विंध्य क्षेत्र, दूर होगी गरीबी

    By Abhishek SharmaEdited By:
    Updated: Sun, 03 Jan 2021 10:05 AM (IST)

    वह दिन दूर नहीं जब विंध्य क्षेत्र का प्रत्येक शहर व गांव समूह की महिलाओं द्वारा तैयार एलइडी बल्ब से रोशन होगा। विकास खंड छानबे के रामपुर नेवढिय़ा में अ ...और पढ़ें

    प्रत्येक शहर व गांव समूह की महिलाओं द्वारा तैयार एलइडी बल्ब से रोशन होगा।
    प्रत्येक शहर व गांव समूह की महिलाओं द्वारा तैयार एलइडी बल्ब से रोशन होगा।

    मीरजापुर, जेएनएन। वह दिन दूर नहीं जब विंध्य क्षेत्र का प्रत्येक शहर व गांव समूह की महिलाओं द्वारा तैयार एलइडी बल्ब से रोशन होगा। विकास खंड छानबे के रामपुर नेवढिय़ा में अंजली स्वयं सहायता समूह द्वारा जलाई गई अलख दिन पर दिन आगे बढ़ रही है। गांव में ही महिलाओं को रोजगार देकर स्वावलंबी बनाने की दिशा में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। एनआरएलएम द्वारा इन महिलाओं की आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त किया जा रहा है। 

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के सपने को राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूह की महिलाएं पूरा कर रहीं है। जनपद में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा 8902 समूह का गठन किया गया है, इसमें लगभग 90 हजार महिलाएं सक्रिय प्रतिभागिता दे रही हैं। एक समूह में लगभग 10 से 12 महिलाएं मेहनत कर रही हैं। उपायुक्त स्वत: रोजगार डा. घनश्याम प्रसाद ने बताया कि समूह की महिलाएं धनार्जन करके स्वरोजगार करती हैं। विभाग की योजना है कि आगामी दिनों में प्रत्येक गांव में कम से कम पांच समूहों को एलइडी बल्ब तैयार करने के लिए प्रशिक्षित करके आत्मनिर्भर बनाया जाए। प्रत्येक समूह में लगभग 10 से 12 महिलाएं काम करती हैं। इसके चलते लगभग एक ब्लाक में 60 महिलाएं प्रशिक्षित होकर अन्य महिलाओं को प्रेरित करके स्वावलंबी बना सकेंगी। समूह की महिलाओं का विश्वास संग दावा है कि इनके बनाए बल्ब अच्छी गुणवत्ता के साथ-साथ काफी सस्ते भी हैं। 

    प्रेरणा श्रोत बना अंजली स्वयं सहायता समूह    

    विंध्य क्षेत्र के छानबे ब्लाक स्थित रामपुर नेवढिय़ां में अंजली स्वयं सहायता समूह की महिलाएं एलइडी बल्ब का निर्माण शुरू कर एक मिसाल कायम की है। इस व्यवसाय के जरिये महिलाएं न सिर्फ आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि दूसरों के घरों को भी रौशन कर रही हैं। अध्यक्ष किरन व कोषाध्यक्ष शशि देवी समूह की महिलाओं को एलइडी बल्ब बनाने का प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बना रही हैं। 

    सात व नौ वाट के एलइडी बल्ब की खपत

    अंजली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा वर्तमान समय में सात और नौ वाट के एलइडी बल्ब का निर्माण के साथ ही मरम्मत भी किया जा रहा है। नए एलइडी की कीमत खुले बाजारों में अन्य कंपनियों की कीमत से काफी कम होने के साथ ही गारंटी ज्यादा दिया जा रहा है। शशि देवी, आरती, सविता, किरन और कंचन द्वारा बीते तीन महीने से एलइडी बल्ब बनाया जा रहा है। महिलाओं द्वारा सीआइएफ के तहत 50 हजार की लागत से काम शुरू किया गया। प्रति दिन लगभग दो सौ एलइडी बल्ब का निर्माण महिलाओं द्वारा किया जा रहा है। 

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    लक्ष्य : जनपद मीरजापुर में एलइडी की होने वाली खपत को समूह सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार कराकर पूरा करने का लक्ष्य है। एक्सइएन मनोज यादव ने बताया कि जनपद भर में लगभग तीन लाख 18 हजार बिजली कनेक्शन हैं। यदि समूह की महिलाओं द्वारा थोड़ा परिश्रम किया गया तो निश्चित तौर पर एलइडी बल्ब की खपत को पूरा करके अपने और अपने परिवार की गरीबी को दूर करके स्वालवलंबी और आत्मनिर्भर बन सकती हैं। 

    एक नजर में योजना

    स्वयं सहायता समूह 8902
    महिलाएं 90 हजार
    प्रति समूह 10-12 महिलाएं
    एलइडी बल्ब  सात व नौ वाट
    निर्माण प्रतिदिन 200 एलइडी
    लागत 55 से 60 रुपया
    फुटकर बिक्री 80-90 रुपया
    थोक बिक्री 70-75 रुपया
    शुद्ध आमदनी 500 से 600 रुपया

    बोले अधिकारी

    राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ग्रामीणों में महिलाओं को स्वरोजगार दिलाकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। एलइडी बल्ब बनाकर समूह की महिलाएं आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनने के साथ ही लोगों को रोजगार मुहैया करा रही हैं। आगामी वर्षो में लक्ष्य है कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं द्वारा एलइडी बल्ब निर्मित कराकर मांग को पूरा किया जा सके। - अविनाश सिंह मुख्य विकास अधिकारी, मीरजापुर।